What is Swiss Bank in Hindi How to Deposit and Withdrawal Money From Swiss Bank in Hindi
What is Swiss Bank in Hindi How to Deposit and Withdrawal Money From Swiss Bank in Hindi
जिस देश के नेता अपने देश से लूटकर बिजनेसमैन टैक्स बचाने के लिए भारत से बाहर स्विस बैंक में जमा करवाते थे। इन्होंने स्विस बैंक में नाम कमाया है, लेकिन हमने सोचा कि चलो आपको बता हैं कि आखिर क्या ये स्विस बैंक और कैसे इसमें लोग अपने पैसों को जमा करवाते थे और क्या वे स्विस बैंक में अपना खाता खुलवा सकते हैं। इन्हीं सब बातों को जानने के लिए आप बने रहिए।
स्विटजरलैंड में सबसे पहले बैंक को 1713 में बनवाया गया, लेकिन पिछले तीन सदियों में यहां पर 400 से भी ज्यादा बैंक हो चुके हैं। अब इन बैंकों के साथ फायदा ये है कि उस देश की प्राइवेसी पॉलिसी इन का को साथ दे दी है। यानी कि ये तमाम बैंकों से सेंट्रल बैंकिंग एक्ट के तहत बैंक एकाउंट खोलने की अधिकार रखते हैं, लेकिन अब जब स्विस बैंक की बात करने वाले वो या बैंक नहीं बल्कि वाई बैंकिंग है, जिसके बारे में लोग सालों से कयास लगाते थे कि आखिर यह काम कैसे होता है। एसबीआई के नाम है यूबीएस जैसे पूरी दुनिया सोर्स के नाम से जानती है। इसकी स्थापना 1998 में यूनियन बैंक ऑफ लाइन और स्विस बैंक कारपोरेशन के मर्जर के बाद हुई थी और आज ये दुनिया के टॉप 3 में से एक है। इस बैंक के हेडक्वार्टर स्विटजरलैंड के चुने गए बसों में अब आपको असली वाले स्विस बैंक के बारे में चीज जानकारी दो गई।
इसीलिए चलिए आपको स्विस बैंक के काम करने के तरीके के बारे बताते हैं तो दोस्तो यूबीएस यानी स्विस बैंक भी वही काम करता है जो दूसरे बैंक करते हैं। सर्विस बैंक के नियम और काम करने के तरीके थोड़े अलग हैं। जैसा कि हमने आपको पहले बताया था कि स्विट्जरलैंड के बैंक 1713 से चले आ रहे बैंक सीक्रेसी के कानून का सख्ती से पालन करते हैं, लेकिन इस बैंक के साथ ये सख्ती बाकी बैंकों से ज्यादा है। यानी ऐसे समझिए कि अगर किसी ने स्विटजरलैंड में कोई अपराध नहीं किया है तो उसके बारे में बैंक कोई भी जानकारी शेयर नहीं करता था। क्या वो किसी सरकार के साथ भी नहीं। यही कारण था कि दुनिया भर के रईस इस बैंक में अपना पैसा जमा करवाते थे और उनकी जानकारी दुनिया भर से छिपी रहती थी।
लेकिन दो हज़ार 17 में पूरी दुनिया ने जब स्विटजरलैंड बैंक पर दबाव बनाया तो स्विस बैंकर्स कानून गठीला करना पड़ा। जिसके बाद स्विस गारमेंट ने नियम बनाया कि स्विटजरलैंड का जिन देशों के साथ कांट्रैक्ट होगा। फोन के साथ वो सारी इन्फोर्मेशन प्रोवाइड करेंगी जो कांट्रैक्ट में शामिल देश को चाहिए। अब सवाल ये उठता है कि जिस स्विस बैंक को काले धन का स्वार कहा जाता था वो आखिर ऐसा कैसे कर लेता है। ये पैसे ब्लैक मनी जमा करने वाले के बारे में कोई डीटेल किसी को पता नहीं होगी तो इसका जवाब है आएगा सीक्रेट कोड। अब आप कहेंगे कि सीक्रेट कोड क्या है तो आपको बता दें कि इसे नंबर ग्राउंड के नाम से भी जाना जाता है और ऐसे ही सबसे सुरक्षित तिजोरी भी कहा जाता है।
आज तक आपने जितने में काले धन के किस्से सुने नंबर काम की वजह से बॉस से बोलो बाएं आइये समझते एस नंबर अकाउंट का तो दोस्तों ये एक ऐसा गांव है जो दो लेवल पर काम करता है। इसमें जो असली नाम पता अरनव मेहंदी है। हाथ से बैंक कैसे छुपा देता है कि फोन बैंक के कर्मचारी भी अकाउंट की असली डिटेल नहीं जान पाते। अब इसके ऊपर आती है वो लेयर जिसमें अकाउंट होल्डर को चार डिजिट का नंबर और उसके साथ अपने मन पसंद का कोई दूसरा नाम चुनना होगा जाता है। कैसे एक एग्जाम्पल के तौर पर समझें तो मान लीजिए कि आपने खाता खुलवाया तो आपकी सारी डिटेल लॉक हो गई। जिसके बाद आपको एक चार डिजिट का नंबर दिया गया। मान लेते हैं वन टू थ्री फोर इसके बाद आपको एक नाम और चुनने को कहा जाता है।
अब मान लेते हैं कि आपने चुना एलिफेंट तब आपकी जो ओपन आरएंडडी होगी। वन टू थ्री फोर एलिफेंट होगी और आपके बारे में सिर्फ यही कोड बैंक के कर्मचारी से लेकर सरकार तक को पता होगा, जिसे आप खोलकर पैसा जमा करवाएंगे और आपको कोई पकड़ने वाला नहीं है। आगे आएंगे बड़े अधिकारी आपके असली नाम का पता लगा सकते हैं। अब आइए आपको बताते हैं कि बैंक एकाउंट कैसे होता है तो इसे खुलवाना मुश्किल काम है। इसके लिए आपको स्विटजरलैंड की बैंक की ब्रांच में जाना होता है। यूबीएस की वेबसाइट के अनुसार इसका मिनिमम बैलेंस 1 लाख डॉलर या ₹75 लाख के आसपास होता है। इस अकाउंट पर 3000 डॉलर्स या तकरीबन 22 हज़ार रुपये का मेंटेनेंस चार्ज भी लगता है। यानी ब्याज तो भूल ही जाइए।
आपका अकाउंट रखने के लिए 300 डॉलर देने होंगे। ठीक वैसे ही जैसे लॉकर का चार्ज हम देते हैं। अब खाता तो खोल गया तो पैसा जमा करने का प्रोसेस मजा लीजिए। स्विस बैंक में खास तरीके से पैसा जमा या निकाला जाता है। आप किसी भी देश से हो, आपके देश की कोई भी करंसी हो पर स्विस बैंक में सिर्फ स्विस फ्रैंक के रूप में पैसा जमा किया जा निकाला जा सकता है। आपको याद है कि स्विस फ्रैंक स्विटजरलैंड की करंसी है आपने बस। रुपया डॉलर या किसी और करंसी में पैसा दिया, लेकिन पहले वह स्विस फ्रैंक में करवाना होगा। यानी उसे स्विस फ्रैंक में बदला जाएगा। आपके खाते में उतने ही स्विस फ्रैंक जमा हो पाएंगे जितने आपके दिए गए पैसों के हिसाब से बनेंगे। यह पूरी तरह से स्विस फ्रैंक की कीमत गवर्नमेंट करता है। आबाद की कंडीशन के हिसाब से अगर पूछें कि क्या बैंक किसी को जानकारी नहीं देता तो आपको बताएं कि अब वो दिन लद गए।
अब स्विटजरलैंड के साथ भारत ने खास कांट्रैक्ट कर लिया है। इसके मुताबिक स्विटजरलैंड में आपने बैंकों में पैसा जमा करने वाले भारतीयों और कंपनियों की जानकारी भारत के साथ साझा करेगा। यह कांट्रैक्ट साल दो हज़ार 18 में लागू हो गया है। हालांकि इसमें एक पेच है। भारत सरकार किसी भी ऐसे बैंक के काम की डिटेल नहीं मान सकती जो दो हज़ार 18 से पहले स्विटजरलैंड में खोले गए थे। इसके अलावा अकाउंट होल्डर के न होने पर स्विस बैंक केवल उसकी संपत्ति के सच्चे वारिसों को ही खाते के बारे में जानकारी देता है। मजेदार बात ये है कि दो हज़ार 19 में जब पहली बार भारत सरकार को स्विस बैंक में भारतीय खाताधारकों की लिस्ट मिली तो सरकार ने भी नाम बताने से मना कर दिया। सरकार का कहना था कि इन्फॉर्मेशन को शेयर करना प्राइवेसी पॉलिसी के तहत आता है।
यानी से कांफिडेंशियल रखना उनकी जिम्मेदारी है और अगर आपको याद हो तो ये वही गवर्नमेंट है जो दो हज़ार 14 से पहले ऐसे ही स्विस बैंक में जमा काले धन को वापस लाकर सबके बैंक अकाउंट्स में 15 ₹15 लाख भेजने का दावा कर रही थी। एक तरफ आपके अकाउंट में आएं तो हमें जरूर बताएं।

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